चंद हादसों से जिंदा

चंद हादसों से रहनुमा थोड़ा बिखर आया हूँ
फिर भी उन रास्तों से जिंदा निकल आया हूँ

अब किसी को बदल ने की कहाँ ताकत मुझ में
सफ़ा दर सफ़ा मैं खुद सफर में बदल आया हूँ

रुसवाई झेलना हो रहा था कितना मुश्किल
चुपके से मेरे दोस्त महफ़िल से निकल आया हूँ

शायद सख्त बनाना चाहता था वक़्त मुझको
मोम हुआ करता था पत्थर में बदल आया हूँ

(Uttam’s pen)
हादसा – accident
रहनुमा- guide
सफ़ा दर सफ़ा – page by page
रुसवाई- ill fame
सख्त- strong
मोम- wax