मैं तुझमें तू मुझमें

मैं मुझसा नही तेरे जैसा हूँ
तू तुझसी नही है मुझसी है
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमें ही घुल जाती है

मेरी लहू की कुछ बूंदें
तेरी रगों में बहती हैं
कुछ मेरी मोहब्बत की ग़ज़लें
तेरे दिल की किताब में रहती हैं
तेरे अश्को में अक्सर
मेरी नेज़े भी धुल जाती हैं
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमे ही घुल जाती है

तेरे सुहाने कुछ सपने
मेरे ख्वाबों में आते हैं
तेरी अदाओ की यादों में
हम अक्सर मुस्काते हैं
तेरी मीठी सीे बातें भी
मेरी ज़ुबाँ पे आती जाती हैं
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमे ही घुल जाती है

हम ‘दो’ नहीं हैं ‘एक’ हैं अब
बस हम ही हम बन जाते हैं
मिलकर हमने ख्वाब जो देखे
उनकी ताबीर में लग जाते हैं
जुड़ जाते है यूँ दो दिल तो
सारी दुनिया झुक जाती है
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमें ही घुल जाती है

(Uttam’s pen)

चंद हादसों से जिंदा

चंद हादसों से रहनुमा थोड़ा बिखर आया हूँ
फिर भी उन रास्तों से जिंदा निकल आया हूँ

अब किसी को बदल ने की कहाँ ताकत मुझ में
सफ़ा दर सफ़ा मैं खुद सफर में बदल आया हूँ

रुसवाई झेलना हो रहा था कितना मुश्किल
चुपके से मेरे दोस्त महफ़िल से निकल आया हूँ

शायद सख्त बनाना चाहता था वक़्त मुझको
मोम हुआ करता था पत्थर में बदल आया हूँ

(Uttam’s pen)
हादसा – accident
रहनुमा- guide
सफ़ा दर सफ़ा – page by page
रुसवाई- ill fame
सख्त- strong
मोम- wax

फेहरिस्त

सालों से गुज़र रहे हैं साल
हर साल के आखिर में होता है एक धमाल
धमालों में मच जाते हैं अक्सर बवाल
और अनसुलझे रह जाते हैं
दिसंबर में जनवरी के सवाल

हर साल का आगाज़ बनाती है
एक नई उम्मीदों की फ़ेहरिस्त
बनाना है बेहतर हर किसी को अपनी जीस्त
हम तो इन तमन्नाओं की होड़ में
रह जाते हैं वहीं के वहीं
उम्मीदें बस उम्मीदें ही रह जाती हैं
फिर दिसंबर आता हैं
फिर से जुट जाते हैं
बनाने में एक लंबी लिस्ट

इस बार इस लिए चलो
फेहरिस्तों को जलाते हैं
बस खुश रहने का ठानते हैं
मुस्कुराते हैं
मुस्कुराहटों की वजह बनते हैं
नफरतों को ठुकराते हैं
मोहब्बतों को आजमाते हैं
चलो जश्न ए ज़िन्दगी मनाते हैं
बोझ उम्मीदों का उतारकर
नए साल का स्वागत करते है

(Uttam’s pen)

फेहरिस्त – list

HAPPY NEW YEAR

Koi shaam aisi nahin

Koi shaam aisi nahi jahaan teri yaad nahi aati
Par Har kisiko to teri chahat mil nahi paati
Tu meri tasavvur ka ek anmol nageena hai
Jaye kahin bhi tu khayalon se nahi jaati

Tere khwabon ke khazaane ki keemat lag nahi paati
Tu aati hai is dil mein ghar me nahi aati
Tu mere kalam mei bhar gayi hai gazal ban ke
Tujhe na sochun to mujhko shayari nahi aati

Khud ki khoobasoorati ki tujhe hi khabar nahi hai
Aisa is liye hai ke tere paas meri nazar nahi hai
Main to dekhta hoon tujhe dekhta hi rehta hoon
Tujh pe meri nazar ka magar koi asar nahi hai

(Uttam’s pen)

Aap se seekhe

Muskuraakar baat karna koi aap se seekhe
Umr ke saath nikharna koi aap se seekhe
Dosti to karne ke liye har koi karta hai
Dost ke dil me utarna koi aap se seekhe
(Uttam’s pen)

Dost

Alag ho zamaane se tum dost
Mera uruj chahte ho
Yahaan log to girte hi
muskuraaya karte hain
Tum juda ho; haath utha kar
Dua mangte ho
Log dil me ranjish rakh ke
haath milaaya karte hain

(Uttam’s pen)

Uruj- rising

मैं और तुम

मैं एक फूल तुम उसपे गितरी धूप
मैं एक पत्थर तुम उसपे बहता झरना
मैं एक किताब तुम उसपे उर्दू की लिखावट
मैं हर्फ़ और तुम उसमे बसे हज़ारों माइने
मैं बर्फ और तुम सर्दी का मौसम
मुझपे छाई हो
मुझसे लिपटी हो
मुझमें समाई हो तुम
(Uttam’s pen)

Kya Kehne

Aap ke soorat o libaz ke kya kehne
Aap ke nazakat bhare andaaz ke kya kehne
Bula rahe hon jaise aap ke rang bhare hont
Aap ki khaamoshi ki awaaz ke kya kehne
(Uttam’s pen)

तुम

तुम हँसी हो ख़ुशी हो
मेरी हँसी में भी तुम ही बसी हो
तुम जिंदगी की आहट हो
तुम ही मुस्कराहट हो
तुम खिलती कली
तुम महकती गली
तुम जान हो
सुबह की अज़ान हो
तुम सुकून हो
करार हो
तुम ही मौसम ए बहार हो
तुम हसरत हो
तुम आरज़ू हो
तुम ही रुबरु
तुम ही जुस्तजू हो
तुम आब हो
तुम ही ख्वाब हो
हर पहेली का
तुम ही जवाब हो
तुम दिल की आवाज़ हो
तुम ही जीने का अंदाज़ हो,,
(Uttam’s pen)