रुखसार

रुखसार तेरा अक्सर देखना ठीक नहीं शायद
बाकी चेहरे फीके लगने लगते है
अशआर मेरे बस तेरी आँखों की
तारीफ़ करने लगते हैं
(Uttam’s pen)

2 Replies to “रुखसार”

  1. बहुत खूब उत्तम जी। शब्दों की जादूगरी आपसे सीखे कोई।

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