October 2017

तुम

तुम हँसी हो ख़ुशी हो मेरी हँसी में भी तुम ही बसी हो तुम जिंदगी की आहट हो तुम ही मुस्कराहट हो तुम खिलती कली तुम महकती गली तुम जान हो सुबह की अज़ान हो तुम सुकून हो करार हो तुम ही मौसम ए बहार हो तुम हसरत हो तुम आरज़ू हो तुम ही रुबरु Continue reading तुम

Asar

Woh nazar aate hain aur hum mar jaate hain Chand palon mein woh kuch aisa asar kar jaate hain Keh nahi paate unki taareef me ek bhi lafz Ke kuch khayal bhi door door tak khabar kar jaate hain (Uttam’s pen)

रुखसार

रुखसार तेरा अक्सर देखना ठीक नहीं शायद बाकी चेहरे फीके लगने लगते है अशआर मेरे बस तेरी आँखों की तारीफ़ करने लगते हैं (Uttam’s pen)