जल रहा है आशियाना

सनसनी सन्नाटों में दहशतों का शोर है

जल रहा है आशियाना, मगर मेरा ध्यान कहीं और है!

मैं हिंदू हूँ , तुम मुस्लिम हो और वो तीसरा कोई और है

जल रहा है आशियाना, मगर मेरा ध्यान कहीं और है!

तुमने कोइले की बात छेड़ी मैंने डीजल के दाम बढ़ा दी

आज इसपे लड़ते रहो, कल का अजेंडा कुछ और है

जल रहा है आशियाना, मगर मेरा ध्यान कहीं और है!

टैक्स तुम भरते हो, मैं विदेश घूम आती हूँ

आज मैं प्रेसिडेंट हूँ, कल कोई और है

जल रहा है आशियाना, मगर मेरा ध्यान कहीं और है!

अनशन मैं करता हूँ, मेरा टीम अन्वेषण करता है

मेरी लड़ाई लोकपाल है या कुछ और है?

जल रहा है आशियाना, मगर मेरा ध्यान कहीं और है!

आबंटन में घपला करता हूँ, अपनों को जमीन दिलाता हूँ

फिर भी , मेरा नमन हर मंदिर की और है

जल रहा है आशियाना, मगर मेरा ध्यान कहीं और है!

मैं मेहनत मजदूरी करता हूँ, भूके सोने से डरता हूँ

मैं क्या जानू, कौन साधू है कौन चोर है

जल रहा है आशियाना, मगर मेरा ध्यान कहीं और है!

न हम में देश भक्ति है , न ईश्वर से मैं डरता हूँ

बस पैसा बनाने कि होड है

जल रहा है आशियाना, मगर मेरा ध्यान कहीं और है!

Written by : Uttam Yaligar

(https://www.facebook.com/uttam.yaligar)