August 2007

इंतज़ार

कोई आये इस छोटे से घर में मोहब्बत से सजा रखा है हमने दर पे खडे हैं गुलदस्ता लिये हुए नज़रों को उनके क़दमों पे बिछा रखा है हमने रंग से कहा है रंगीन बनायें उनकी शामें फर्श से ठंडे रहने की गुजारिश किया है हमने कुर्सियों से कहा है वो थक कर बैठें तो Continue reading इंतज़ार