May 2007

वादा …. एक अजनबी से !

दिल -ओ -जान से चाहेंगे .. उन्हें , जो बहारें समेट लायेंगे मगर वो अजनबी जो दिल पे दस्तक दे कर छुप जाता है उसे हकीकत में कैसे पायेंगे ? वो कभी अनदेखा सा लगता है तो कभी जाना पहचाना सा कभी हमदम सा तो कभी अनजाना सा शायद बाना है वो मेरे लिए , Continue reading वादा …. एक अजनबी से !

क्या मैं भुला पाया हूँ ?

उनको भूला हूँ मैं या मुझे कभी कभी ऐसा लगता है ? यह सवाल जब दिल से करता हूँ ..तो फिर वही दर्द सा जगता है ॥ आंखें बंद करता हूँ किसी और के सपने देखने के लिए मगर फिर उनही की निगाहों का सुरूर छाता है ॥ निकालता हूँ किसी के हुस्न की तलाश Continue reading क्या मैं भुला पाया हूँ ?