मैं तुझमें तू मुझमें

मैं मुझसा नही तेरे जैसा हूँ
तू तुझसी नही है मुझसी है
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमें ही घुल जाती है

मेरी लहू की कुछ बूंदें
तेरी रगों में बहती हैं
कुछ मेरी मोहब्बत की ग़ज़लें
तेरे दिल की किताब में रहती हैं
तेरे अश्को में अक्सर
मेरी नेज़े भी धुल जाती हैं
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमे ही घुल जाती है

तेरे सुहाने कुछ सपने
मेरे ख्वाबों में आते हैं
तेरी अदाओ की यादों में
हम अक्सर मुस्काते हैं
तेरी मीठी सीे बातें भी
मेरी ज़ुबाँ पे आती जाती हैं
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमे ही घुल जाती है

हम ‘दो’ नहीं हैं ‘एक’ हैं अब
बस हम ही हम बन जाते हैं
मिलकर हमने ख्वाब जो देखे
उनकी ताबीर में लग जाते हैं
जुड़ जाते है यूँ दो दिल तो
सारी दुनिया झुक जाती है
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमें ही घुल जाती है

(Uttam’s pen)

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