मैं और तुम

मैं एक फूल तुम उसपे गितरी धूप
मैं एक पत्थर तुम उसपे बहता झरना
मैं एक किताब तुम उसपे उर्दू की लिखावट
मैं हर्फ़ और तुम उसमे बसे हज़ारों माइने
मैं बर्फ और तुम सर्दी का मौसम
मुझपे छाई हो
मुझसे लिपटी हो
मुझमें समाई हो तुम
(Uttam’s pen)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *