My poems and you

My poems lay
Scattered in your pathway
Hoping that you will do this
Pick them up and kiss
And then they would fly
Turn into stars and occupy the sky

My words look at you
They want to mean to you
All that is to be told
Coz when I face you
My feet become cold
The metaphors want you to know
That you are you
And comparisons fail miserably
To describe you

My pen always
Sketches a picture of you
Says you are needed
For the thoughts to flow
Oh dear! do you know
Of my poetry
You are the charm , glitter and glow

(Uttam’s pen)

ನೆರಳು


ನನ್ನ ನೆರಳು ನನ್ನದೇ ಎನ್ನುವ ಭ್ರಮೆ ಎಲ್ಲರಿಗೂ
ಕತ್ತಲೆಯು ಕಸಿದುಕೊಳ್ಳುವದೆಂದು
ತಿಳಿದಿದ್ದರೂ ಅಲ್ಲಗಳೆಯುತ್ತೇವೆ
ಈ ದೇಹದ ನೆರಳದು..
ನೆರಳು ನನ್ನದೆನ್ನಲು, ದೇಹ ನನ್ನದೇ?
ಅಥವಾ ತಿಳಿದಿರದ ಅವಧಿಗೆ ಬಾಡಿಗೆಗೆ ಪಡೆದಿರುವದೇ?
ಅರೆ ಏನಿದು ಛಾಯೆ
ಏಕೆ ಎಲ್ಲವನ್ನು ಅಸ್ಪಷ್ಟಗೊಳಿಸಿದೆ
ಕತ್ತಲಾದ ತಕ್ಷಣ ಬಿಟ್ಟು ಹೋಗುವ ನೆರಳು
ಒಂದು ದಿನ ಈ ದೇಹವನ್ನೇ
ಸುಟ್ಟು ಹೋಗುವ ಜನರು
ನೆರಳಾಟವೋ ಇದು ನರಳಾಟವೋ
ಎಷ್ಟೊಂದು ನೆರಳುಗಳು
ದಿನಾಲೂ ಸೃಷ್ಟಿಯಾಗುತ್ತಿವೆ
ಎಷ್ಟೊಂದು ನೆರಳುಗಳು
ದಿನಾಲೂ ಮಾಯವಾಗುತ್ತಿವೆ
ಕೆಲವು ಮನೆಕಟ್ಟುತ್ತಿವೆ
ಕೆಲವು ಕಾರು ಖರೀದಿಸುತ್ತಿವೆ
ಕೆಲವು ಪಕ್ಷಕಟ್ಟುತ್ತಿವೆ
ಕೆಲವು ಪ್ರತಿಭಟನೆ ಮಾಡುತ್ತಿವೆ
ಕೆಲವು ಭಾಷಣ ಬಿಗಿಯುತ್ತಿವೆ
ಕೆಲವು ಹಿಂಡು ಹಿಂಡಾಗಿ ಜೈಕಾರ ಹಾಕುತ್ತಿವೆ
ಕೆಲವು ಮೂರ್ತಿ ನಿಲ್ಲುಸುತ್ತಿವೆ
ಕೆಲವು ಉರುಳಿಸುತ್ತಿವೆ
ಇನ್ನೂ ಕೆಲವು ಗನ್ ಖರೀದಿಸುತ್ತಿವೆ
ಮತ್ತೆ ಹಲವು ಬೆನ್ನಿಗೆ ಬಾಂಬು ಕಟ್ಟಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿವೆ
ಎಂಥ ನೆರಳಿನಾಟವಿದು ಜಗತ್ತು
ಪರದೆ ಬೀಳುವದು ಯಾವತ್ತು

(Uttam’s pen)

मैं तुझमें तू मुझमें

मैं मुझसा नही तेरे जैसा हूँ
तू तुझसी नही है मुझसी है
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमें ही घुल जाती है

मेरी लहू की कुछ बूंदें
तेरी रगों में बहती हैं
कुछ मेरी मोहब्बत की ग़ज़लें
तेरे दिल की किताब में रहती हैं
तेरे अश्को में अक्सर
मेरी नेज़े भी धुल जाती हैं
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमे ही घुल जाती है

तेरे सुहाने कुछ सपने
मेरे ख्वाबों में आते हैं
तेरी अदाओ की यादों में
हम अक्सर मुस्काते हैं
तेरी मीठी सीे बातें भी
मेरी ज़ुबाँ पे आती जाती हैं
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमे ही घुल जाती है

हम ‘दो’ नहीं हैं ‘एक’ हैं अब
बस हम ही हम बन जाते हैं
मिलकर हमने ख्वाब जो देखे
उनकी ताबीर में लग जाते हैं
जुड़ जाते है यूँ दो दिल तो
सारी दुनिया झुक जाती है
मैं तुझमें शामिल होता हूँ
तू मुझमें ही घुल जाती है

(Uttam’s pen)

(Be)longings

Let me retire to my belongings
And stay away from stray longings
For the abundance of everything I have
For the impermanence of anything I aquire
To avoid the scars of unfulfillment
Let me dissolve the mountains of desire
Into the calmness of lake
For the mind’s sake
Let me balance
Let me be in equilibrium with my surroundings
Let me celebrate everything that I have
Not look for replacements
That would cause displacements
Let me attain a state
Where ‘with’ and ‘without’ mean the same
Let me settle for my worth

(Uttam’s pen)

ಮನದ ಗಲಭೆ

ಮನದ ಗಲಭೆಗಳು ಸುಲಭವಾಗಿ ಶಾಂತವಾಗುವದಿಲ್ಲ
ನಿನ್ನ ಕಿರುನೋಟ ಮೂಡಿಸುತ್ತಿರುವ ಮುಗುಳ್ನಗು ಅಂತರಂಗದ ಪ್ರತಿಬಿಂಬವಲ್ಲ
ನೀನು ಸೂರ್ಯನಂತೆ ಪ್ರಕಾಶಮಾನವಾಗಿರುವೆ ನಿಜ
ಆದರೆ ನನ್ನ ನೋವುಗಳು ಇಬ್ಬನಿಯ ಹನಿಗಳಲ್ಲ
ನಿನ್ನ ಸಾಮೀಪ್ಯ ನೀಡುವ ಮರೆವಿನ ಮದ್ದು ಅಸ್ಥಾಯಿ
ಅರೆಗಳಿಗೆಯಲ್ಲಿ ಮರಳುವದು ಆ ವಿವಶತೆಯ ಮರಳು
ಸಾಗರದಾಚೆ ತೆರೆಗಳನ್ನು ಎಣಿಸುವದಷ್ಟೇ ನನ್ನ ಆಟ
ತೆರೆಗಳ ಹುಟ್ಟು ಸಾವು ಅದೆಲ್ಲೋ ಅವಿತ ಕಾಣದ ಕೈಗಳ ಮಾಟ

(Uttam’s pen)

चंद हादसों से जिंदा

चंद हादसों से रहनुमा थोड़ा बिखर आया हूँ
फिर भी उन रास्तों से जिंदा निकल आया हूँ

अब किसी को बदल ने की कहाँ ताकत मुझ में
सफ़ा दर सफ़ा मैं खुद सफर में बदल आया हूँ

रुसवाई झेलना हो रहा था कितना मुश्किल
चुपके से मेरे दोस्त महफ़िल से निकल आया हूँ

शायद सख्त बनाना चाहता था वक़्त मुझको
मोम हुआ करता था पत्थर में बदल आया हूँ

(Uttam’s pen)
हादसा – accident
रहनुमा- guide
सफ़ा दर सफ़ा – page by page
रुसवाई- ill fame
सख्त- strong
मोम- wax

फेहरिस्त

सालों से गुज़र रहे हैं साल
हर साल के आखिर में होता है एक धमाल
धमालों में मच जाते हैं अक्सर बवाल
और अनसुलझे रह जाते हैं
दिसंबर में जनवरी के सवाल

हर साल का आगाज़ बनाती है
एक नई उम्मीदों की फ़ेहरिस्त
बनाना है बेहतर हर किसी को अपनी जीस्त
हम तो इन तमन्नाओं की होड़ में
रह जाते हैं वहीं के वहीं
उम्मीदें बस उम्मीदें ही रह जाती हैं
फिर दिसंबर आता हैं
फिर से जुट जाते हैं
बनाने में एक लंबी लिस्ट

इस बार इस लिए चलो
फेहरिस्तों को जलाते हैं
बस खुश रहने का ठानते हैं
मुस्कुराते हैं
मुस्कुराहटों की वजह बनते हैं
नफरतों को ठुकराते हैं
मोहब्बतों को आजमाते हैं
चलो जश्न ए ज़िन्दगी मनाते हैं
बोझ उम्मीदों का उतारकर
नए साल का स्वागत करते है

(Uttam’s pen)

फेहरिस्त – list

HAPPY NEW YEAR

Koi shaam aisi nahin

Koi shaam aisi nahi jahaan teri yaad nahi aati
Par Har kisiko to teri chahat mil nahi paati
Tu meri tasavvur ka ek anmol nageena hai
Jaye kahin bhi tu khayalon se nahi jaati

Tere khwabon ke khazaane ki keemat lag nahi paati
Tu aati hai is dil mein ghar me nahi aati
Tu mere kalam mei bhar gayi hai gazal ban ke
Tujhe na sochun to mujhko shayari nahi aati

Khud ki khoobasoorati ki tujhe hi khabar nahi hai
Aisa is liye hai ke tere paas meri nazar nahi hai
Main to dekhta hoon tujhe dekhta hi rehta hoon
Tujh pe meri nazar ka magar koi asar nahi hai

(Uttam’s pen)

Aap se seekhe

Muskuraakar baat karna koi aap se seekhe
Umr ke saath nikharna koi aap se seekhe
Dosti to karne ke liye har koi karta hai
Dost ke dil me utarna koi aap se seekhe
(Uttam’s pen)